
देहरादून। उत्तराखंड के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थल मसूरी में टूरिस्ट रजिस्ट्रेशन सिस्टम एक बार फिर सवालों के घेरे में है। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त आंकड़ों के आधार पर सामाजिक कार्यकर्ता अनूप नौटियाल ने दावा किया है कि वर्तमान व्यवस्था में वास्तविक पर्यटकों की तुलना में बेहद कम लोगों का ही पंजीकरण हो रहा है। उनका कहना है कि मौजूदा स्थिति को देखते हुए संभव है कि केवल 5 से 10 प्रतिशत पर्यटकों का ही रजिस्ट्रेशन हो रहा हो, जिसकी स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए।
आरटीआई के अनुसार अगस्त 2025 से मई 2026 तक 10 महीनों में केवल 1,16,008 पर्यटकों का पंजीकरण दर्ज हुआ। जबकि इसी अवधि में सप्ताहांत, त्योहारों, छुट्टियों और ग्रीष्मकाल के दौरान मसूरी में भारी संख्या में पर्यटक पहुंचे थे।
10 महीने में कितने पर्यटकों का हुआ रजिस्ट्रेशन?
आरटीआई के अनुसार माहवार पंजीकरण इस प्रकार रहा—
* अगस्त 2025 – 27,349
* सितंबर – 5,876
* अक्टूबर – 8,571
* नवंबर – 6,134
* दिसंबर – 9,346
* जनवरी 2026 – 4,983
* फरवरी – 3,003
* मार्च – 4,759
* अप्रैल – 20,731
* मई – 25,256
इन सभी महीनों को मिलाकर कुल 1,16,008 पर्यटकों का रजिस्ट्रेशन दर्ज किया गया।
2022 और 2026 के आंकड़ों में बड़ा अंतर
अनूप नौटियाल ने सरकार की पहले से उपलब्ध रिपोर्ट और आरटीआई के आंकड़ों की तुलना करते हुए कहा कि जनवरी से मई 2022 के बीच मसूरी में 3,78,037 पर्यटक पहुंचे थे।
इसके विपरीत जनवरी से मई 2026 के दौरान केवल 58,732 पर्यटकों का रजिस्ट्रेशन दर्ज हुआ। यानी वर्तमान पंजीकरण संख्या वर्ष 2022 की पर्यटक संख्या का करीब 15 प्रतिशत ही है।
उनका कहना है कि दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद मसूरी आने वाले पर्यटकों की संख्या पहले से बढ़ने की संभावना है। ऐसे में मौजूदा आंकड़े संकेत देते हैं कि वास्तविक पर्यटकों की तुलना में पंजीकरण बेहद कम हो रहा है।
जोशीमठ संकट के बाद शुरू हुई थी व्यवस्था
यह व्यवस्था जनवरी 2023 में जोशीमठ भू-धंसाव संकट के बाद राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के हस्तक्षेप के बाद शुरू की गई थी।
एनजीटी ने मसूरी की वैज्ञानिक कैरिंग कैपेसिटी (Carrying Capacity) का आकलन करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद उत्तराखंड सरकार ने मुख्य सचिव की अध्यक्षता में नौ सदस्यीय समिति गठित की, जिसे मसूरी की वहन क्षमता का अध्ययन कर आवश्यक सुधारात्मक उपाय सुझाने की जिम्मेदारी दी गई।
सरकार ने 24 जुलाई 2023 को एनजीटी के समक्ष अपनी रिपोर्ट में 18 सुधारात्मक और निवारक उपायों का उल्लेख करते हुए कहा था कि पर्यटन प्रबंधन के लिए कैरिंग कैपेसिटी के अनुरूप पर्यटकों का पंजीकरण आवश्यक है।
अधूरे आंकड़ों से वैज्ञानिक योजना प्रभावित

* पार्किंग व्यवस्था
* जलापूर्ति
* ठोस कचरा प्रबंधन
* होटल एवं आवास क्षमता
* आपातकालीन सेवाएं
* मसूरी के संवेदनशील पर्यावरण पर दबावइन सभी का वैज्ञानिक आकलन प्रभावित होगा।उनके अनुसार अधूरे आंकड़ों के आधार पर बनाई गई योजनाएं भविष्य में गलत निष्कर्षों और कमजोर नीति निर्माण का कारण बन सकती हैं।
टेक्नोलॉजी आधारित सिस्टम की मांग
अनूप नौटियाल ने कहा कि टूरिस्ट रजिस्ट्रेशन केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि प्रभावी पर्यटन प्रबंधन का आधार होना चाहिए। उन्होंने मांग की कि—
* मौजूदा व्यवस्था की तत्काल समीक्षा हो।
* रजिस्ट्रेशन सिस्टम की कमियों की जांच की जाए।
* नियमों के पालन को सख्ती से लागू किया जाए।
* पर्यटन विभाग, स्थानीय प्रशासन और अन्य एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय बनाया जाए।
* टेक्नोलॉजी आधारित, पारदर्शी और विश्वसनीय रजिस्ट्रेशन सिस्टम विकसित किया जाए।
NGT से भी हस्तक्षेप की मांग
अनूप नौटियाल ने कहा कि वर्ष 2022 के पर्यटक आंकड़ों और वर्तमान रजिस्ट्रेशन के बीच भारी अंतर को देखते हुए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) को भी जमीनी स्थिति का संज्ञान लेकर आवश्यक सुधारात्मक निर्देश जारी करने चाहिए। उनका कहना है कि जब तक वास्तविक पर्यटक संख्या का विश्वसनीय रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होगा, तब तक मसूरी की कैरिंग कैपेसिटी का वैज्ञानिक आकलन और पर्यटन का प्रभावी प्रबंधन संभव नहीं होगा।
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