
देहरादून। उत्तरकाशी के धराली में आई विनाशकारी आपदा की पहली बरसी पर प्रदेश कांग्रेस ने धामी सरकार के राहत, पुनर्वास और मुआवजा कार्यों को लेकर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस की प्रदेश प्रवक्ता डॉ. प्रतिमा सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार ने बड़े-बड़े दावे तो किए, लेकिन एक साल बाद भी प्रभावित परिवारों को न तो पर्याप्त मुआवजा मिला और न ही स्थायी पुनर्वास की व्यवस्था हो सकी।
डॉ. प्रतिमा सिंह ने जारी बयान में कहा कि 5 अगस्त 2025 को आई जल-प्रलय ने दर्जनों लोगों की जान ले ली थी, जबकि सैकड़ों परिवारों के घर, होटल, गेस्ट हाउस और सेब के बाग पूरी तरह तबाह हो गए थे। उनका आरोप है कि सरकार अब भी केवल कागजी उपलब्धियां गिनाकर अपनी जिम्मेदारी से बचने का प्रयास कर रही है।
‘करोड़ों के नुकसान पर चंद रुपये का मुआवजा’
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि धराली बाजार के जिन व्यापारियों के होटल, होमस्टे और गेस्ट हाउस पूरी तरह नष्ट हो गए, उन्हें वास्तविक नुकसान के मुकाबले बेहद कम आर्थिक सहायता दी गई। उनके मुताबिक यह मुआवजा नए निर्माण की लागत के सामने बेहद अपर्याप्त है और अधिकांश व्यापारी आज भी कर्ज के बोझ तले दबे हुए हैं।
सेब उत्पादकों की अनदेखी का आरोप
डॉ. प्रतिमा सिंह ने कहा कि हर्षिल और धराली घाटी की अर्थव्यवस्था सेब उत्पादन पर आधारित है, लेकिन आपदा में नष्ट हुए बागों के पुनरुद्धार के लिए कोई प्रभावी योजना लागू नहीं की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि पौध वितरण जैसी योजनाएं केवल घोषणाओं तक सीमित रहीं, जबकि किसान आज भी आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।
‘एक साल बाद भी नहीं मिला स्थायी पुनर्वास’
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि आपदा प्रभावित परिवारों के लिए अब तक सुरक्षित भूमि चिह्नित नहीं की गई है। बयान में कहा गया कि कई परिवार आज भी अस्थायी टिन शेडों या किराए के कमरों में रहने को मजबूर हैं और सरकार कोई दीर्घकालिक पुनर्वास नीति लागू नहीं कर सकी।
चारधाम मार्ग की सुरक्षा पर भी उठाए सवाल
प्रदेश प्रवक्ता ने गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग की स्थिति पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि कई स्थानों पर भू-धंसाव और सड़क में दरारें यह संकेत देती हैं कि स्थायी और वैज्ञानिक समाधान की दिशा में पर्याप्त काम नहीं हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्थायी व्यवस्थाओं को ही उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।
2027 चुनाव का किया जिक्र
डॉ. प्रतिमा सिंह ने दावा किया कि पहाड़ की जनता सरकार की कार्यशैली को देख रही है और आपदा प्रभावितों की उपेक्षा का असर आगामी 2027 विधानसभा चुनाव में दिखाई देगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रभावितों को वास्तविक आर्थिक क्षति के अनुरूप मुआवजा और स्थायी पुनर्वास नहीं मिला तो भागीरथी घाटी के लोग सरकार को माफ नहीं करेंगे।
हालांकि, राज्य सरकार लगातार यह दावा करती रही है कि धराली क्षेत्र में पुनर्वास, राहत वितरण और आधारभूत ढांचे के पुनर्निर्माण का कार्य तेजी से किया गया है। ऐसे में धराली आपदा की पहली बरसी पर राहत और पुनर्वास को लेकर सरकार और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं।



