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3 लाख से ज्यादा महिलाएं बनीं लखपति दीदी, जानिए धामी राज में कैसे बढ़ी ग्रामीण महिलाओं की कमाई?

Uttarakhand Lakhpati Didi: 3 लाख पार हुआ आंकड़ा, 1.12 लाख महिलाओं का नया लक्ष्य

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  • उत्तराखंड में ‘लखपति दीदी’ का आंकड़ा 3 लाख पार, अब 1.12 लाख महिलाओं पर सरकार की नजर
  • खेती, डेयरी से होमस्टे तक… उत्तराखंड में 3 लाख महिलाएं बनीं ‘लखपति दीदी’, आगे का लक्ष्य बड़ा
  • 3.03 लाख से ज्यादा महिलाएं बनीं लखपति दीदी, SHG से जुड़ी 5.19 लाख महिलाओं को मिल रहा स्वरोजगार का सहारा
देहरादून: उत्तराखंड में महिला स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। प्रदेश में लखपति दीदियों की संख्या 3 लाख का आंकड़ा पार कर 3,03,696 पहुंच गई है। राज्य सरकार के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब 1.12 लाख और महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य रखा गया है। 

उत्तराखंड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत नवंबर 2022 से संचालित लखपति दीदी योजना के जरिए ग्रामीण महिलाओं को आय बढ़ाने वाली गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। सरकार के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2025-26 तक 3,03,696 महिलाएं अपनी वार्षिक आय एक लाख रुपये से अधिक करने में सफल रही हैं।

खेती से होमस्टे तक, इन कामों से बढ़ी महिलाओं की आय

स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं जैविक खेती, फूड प्रोसेसिंग, मसाला निर्माण, हस्तशिल्प, डेयरी-पशुपालन, मधुमक्खी पालन, मशरूम उत्पादन और होमस्टे जैसे व्यवसायों से जुड़ रही हैं। मिलेट आधारित बेकरी उत्पाद भी महिलाओं के लिए आय का नया जरिया बन रहे हैं।

24 ग्रोथ सेंटर, 33 नैनो पैकेजिंग यूनिट और 17 सरस सेंटर

महिलाओं के उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए प्रदेश में 24 ग्रोथ सेंटर, 33 नैनो पैकेजिंग यूनिट और 17 सरस सेंटर संचालित किए जा रहे हैं। सरकार के अनुसार जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित सरस मेलों के जरिए स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाया जा रहा है।

 ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ से लोकल प्रोडक्ट को ब्रांडिंग

 

महिला स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण महिलाओं के उत्पादों को बाजार में पहचान दिलाने के लिए ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ ब्रांड को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। सरकार का दावा है कि बेहतर ब्रांडिंग, पैकेजिंग और गुणवत्ता के चलते उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों की मांग महानगरों और बड़े शहरों में बढ़ी है।

5.19 लाख महिलाएं SHG नेटवर्क से जुड़ीं

उत्तराखंड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत प्रदेश के सभी 13 जिलों और 95 ब्लॉकों में 5,19,943 महिलाओं को संगठित किया गया है। इनके लिए 70,767 स्वयं सहायता समूह, 8,179 ग्राम संगठन और 615 क्लस्टर लेवल फेडरेशन बनाए गए हैं।

सरकार का फोकस सिर्फ ‘लखपति दीदी’ तक सीमित नहींमहिला आर्थिक सशक्तिकरण के लिए सरकार ने मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना, मुख्यमंत्री सशक्त बहना योजना, ड्रोन दीदी योजना, सोलर सखी योजना, मुख्यमंत्री सतत आजीविका मिशन, मुख्यमंत्री नारी सशक्तिकरण योजना और मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना जैसी योजनाओं का भी उल्लेख किया है।

धामी सरकार का कहना है कि महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों से जोड़कर उनकी आय के नए स्रोत विकसित किए जा रहे हैं और स्वयं सहायता समूहों को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती का महत्वपूर्ण आधार बनाया जा रहा है।

क्या है अगला लक्ष्य?
अब सरकार की नजर 2026-27 के 1.12 लाख नए लखपति दीदियों के लक्ष्य पर है। यदि यह लक्ष्य हासिल होता है तो उत्तराखंड में आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर महिलाओं की संख्या और तेजी से बढ़ने की उम्मीद है।
फाइल फ़ोटो

उत्तराखंड में लखपति दीदियों की संख्या 3,03,696 पहुंच गई है। सरकार ने 2026-27 में 1.12 लाख और महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य रखा है।

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