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भारत में पहली बार! उत्तराखंड के 100 ट्रेकिंग रूट्स की हाईटेक GPS Mapping का अभियान शुरू, CM धामी ने दिखाई हरी झंडी

नवंबर से पहले 5000 मीटर से ऊंचे हाई-एल्टीट्यूड ट्रेक रूट्स होंगे मैप, 'नो-नेटवर्क जोन' में भी ट्रेकर की सुरक्षा करेगा ऐप

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देहरादून, 18 सितंबर 2026। उत्तराखंड ट्रेकिंग पर्यटन के क्षेत्र में देश का पहला राज्य बन गया है, जहां 100 ट्रेकिंग रूट्स की हाईटेक GPS Mapping का अभियान शुरू हुआ है। शुक्रवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय, देहरादून से प्रातः 9:35 बजे हरी झंडी दिखाकर उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद (UTDB) की GPS/GIS Mapping Teams को रवाना किया। ये टीमें प्रदेश के 100 प्रमुख ट्रेकिंग रूट्स की वैज्ञानिक GPS Mapping एवं Technical Survey करेंगी।
रवाना की गई टीमों में GPS विशेषज्ञ, GIS विशेषज्ञ, ट्रैकिंग विशेषज्ञ, ट्रैक लीडर्स, कंटेंट राइटर्स तथा ऐप डेवलपर्स शामिल हैं। पहले चरण में टीमें 35 ट्रेक रूट्स को कवर करेंगी, जिसमें विशेष फोकस 5000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले हाई-एल्टीट्यूड ट्रेक रूट्स पर रहेगा, ताकि नवंबर में बर्फबारी शुरू होने से पहले इनका सर्वेक्षण पूर्ण किया जा सके।इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा,“उत्तराखंड की पहचान हमेशा से साहसिक एवं ट्रेकिंग पर्यटन की रही है। आज हम देश में पहली बार अपने ट्रेकिंग रूट्स को आधुनिक तकनीक से जोड़कर एक नया इतिहास रच रहे हैं। यह पहल प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के विकसित भारत 2047 के संकल्प के अनुरूप उत्तराखंड को एक तकनीक-सक्षम, सुरक्षित एवं टिकाऊ ट्रेकिंग डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करेगी।”

सुगम एवं सुरक्षित ट्रेकिंग की दिशा में ऐतिहासिक कदम

सचिव पर्यटन धीराज सिंह गर्ब्याल ने बताया, “यह देश में अपनी तरह की पहली परियोजना है। वन विभाग, उत्तराखंड के सहयोग से तैयार होने वाला यह डेटाबेस ट्रेक रूट्स, कैंपसाइट्स, टॉयलेट्स सहित सभी सुविधाओं की सटीक जानकारी देगा, जिससे ट्रेकिंग की फिजिबिलिटी, सुरक्षा और टिकाऊ प्रबंधन तीनों सुनिश्चित होंगे।”

‘नो-नेटवर्क जोन’ में भी ट्रेकर की जान बचाएगा ऐप

इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता इससे विकसित होने वाला Online एवं Offline GPS Navigation App होगा। इसकी खास बात यह है कि यह इंटरनेट कनेक्टिविटी न होने वाले ‘नो-नेटवर्क जोन’ में भी काम करेगा — यदि कोई ट्रेकर रास्ता भटक जाए या निर्धारित ट्रैक से भटक जाए, तो ऐप स्वतः उसे सही मार्ग पर वापस रीरूट करेगा। इससे दुर्गम एवं दूरस्थ क्षेत्रों में ट्रेकर्स की सुरक्षा काफी बेहतर होगी।

दूरस्थ ट्रेकिंग स्थलों को मिलेगी डिजिटल पहचान

GPS/GIS आधारित मैपिंग से ट्रेकिंग रूट्स की दूरी, ऊंचाई, प्रमुख पड़ाव और उपलब्ध संसाधनों जैसी जानकारियां व्यवस्थित रूप से दर्ज की जाएंगी। इससे प्रदेश के दूरस्थ और कम ज्ञात ट्रेकिंग स्थलों को डिजिटल पर्यटन मानचित्र पर पहचान दिलाने में भी मदद मिलेगी।

उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद के अनुसार यह पहल प्रदेश में सुरक्षित, जिम्मेदार, सुगम एवं तकनीक आधारित ट्रेकिंग पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगी।

उत्तराखण्ड के 100 प्रमुख ट्रेक एवं हाइक रूट्स की होगी GPS/GIS मैपिंग

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने GPS/GIS मैपिंग एवं तकनीकी सर्वेक्षण के लिए अभियान दल को किया फ्लैग ऑफ

ट्रेकिंग को अधिक सुरक्षित, सुव्यवस्थित और तकनीक आधारित बनाने में महत्वपूर्ण होगी पहल

ऑफलाइन एवं ऑनलाइन GPS नेविगेशन ऐप विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ेगा उत्तराखण्ड

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय से उत्तराखण्ड के 100 प्रमुख ट्रेक एवं हाइक रूट्स की GPS/GIS मैपिंग एवं तकनीकी सर्वेक्षण के लिए जाने वाले अभियान दल को फ्लैग ऑफ किया। उत्तराखण्ड पर्यटन विकास परिषद द्वारा गठित टीमें चयनित ट्रेक रूट्स का स्थलीय सर्वेक्षण कर उनकी विस्तृत GPS/GIS मैपिंग करेंगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड में साहसिक एवं ट्रेकिंग पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। राज्य के प्रसिद्ध ट्रेकिंग क्षेत्रों के साथ ही दूरस्थ एवं कम प्रसिद्ध ट्रेक रूट्स को सुव्यवस्थित रूप से पर्यटन मानचित्र पर लाने के लिए आधुनिक तकनीक का अधिक से अधिक उपयोग किया जाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि इस पहल से ट्रेकिंग को अधिक सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित बनाने में मदद मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ पर्यटकों की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। ट्रेक रूट्स की वैज्ञानिक मैपिंग से ट्रेकर्स को मार्ग से संबंधित आवश्यक जानकारियां उपलब्ध कराने के साथ ही आपातकालीन परिस्थितियों में राहत एवं बचाव कार्यों को अधिक प्रभावी बनाने में भी सहायता मिलेगी। उन्होंने कहा कि पर्यटन विकास के साथ उत्तराखण्ड की संवेदनशील हिमालयी पारिस्थितिकी के संरक्षण की दिशा में विशेष ध्यान रखा जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परियोजना से राज्य के दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। इससे स्थानीय युवाओं के लिए गाइडिंग, होमस्टे एवं पर्यटन से जुड़ी अन्य गतिविधियों के माध्यम से रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। उन्होंने अधिकारियों को परियोजना के क्रियान्वयन में स्थानीय लोगों की सहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

सचिव पर्यटन धीराज सिंह गर्ब्याल ने जानकारी दी कि परियोजना के तहत राज्य के 100 प्रमुख ट्रेक एवं हाइक रूट्स की GPS/GIS मैपिंग तथा तकनीकी सर्वेक्षण किया जाएगा। मैपिंग के आधार पर ऑफलाइन एवं ऑनलाइन GPS नेविगेशन ऐप विकसित किया जाएगा, जिससे नेटवर्क कनेक्टिविटी उपलब्ध न होने की स्थिति में भी ट्रेकर्स अपने मोबाइल फोन पर ट्रेल एवं रूट से संबंधित आवश्यक जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि परियोजना के सफल क्रियान्वयन के बाद उत्तराखण्ड सभी 100 मैप किए गए ट्रेक मार्गों को कवर करने वाला ऑफलाइन एवं ऑनलाइन GPS नेविगेशन ऐप विकसित करने वाला देश का पहला राज्य बनेगा। ऐप ट्रेकर्स को बेहतर नेविगेशन सुविधा उपलब्ध कराने के साथ आपातकालीन परिस्थितियों में रेस्क्यू ऑपरेशन में भी उपयोगी होगा।

सचिव पर्यटन ने बताया कि मैपिंग के दौरान ट्रेक रूट्स पर कैंप साइट्स, डस्टबिन एवं शौचालय के लिए उपयुक्त स्थानों की भी पहचान की जाएगी। इससे भविष्य में ट्रेकिंग रूट्स पर आवश्यक सुविधाओं के विकास, बेहतर कूड़ा प्रबंधन तथा पर्यावरण संरक्षण की दिशा में योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया जा सकेगा। उत्तराखण्ड पर्यटन के आधिकारिक मास्टर प्लान में भी ट्रेक मार्गों की सुरक्षा, संचार सुविधा, संकेतक और आपातकालीन निकासी जैसी व्यवस्थाओं को महत्वपूर्ण माना गया है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना राज्य में सतत एवं विज्ञान आधारित पर्यटन मॉडल विकसित करने में सहायक होगी। परियोजना के अंतर्गत विस्तृत परियोजना रिपोर्ट और कॉफी टेबल बुक भी तैयार की जाएगी, जिससे राज्य के कम प्रसिद्ध ट्रेकिंग क्षेत्रों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में मदद मिलेगी।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, अपर सचिव पर्यटन एवं अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी उत्तराखण्ड पर्यटन विकास परिषद अभिषेक रुहेला, अपर निदेशक पर्यटन पूनम चंद एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

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