

- अड्डा इनसाइडर की पहली वर्षगांठ पर देहरादून में जुटे सियासत, शासन और समाज के प्रमुख चेहरे; धामी ने कांग्रेस पर साधा निशाना, हरीश रावत ने रोजगार के आंकड़ों पर सरकार को घेरा
- अड्डा उत्तराखंड कॉनक्लेव में 2027 का रण साफ: धामी बोले- जनता सब देख रही, भाजपा फिर बनाएगी सरकार
- अड्डा इनसाइडर की पहली वर्षगांठ पर देहरादून में सत्ता, विपक्ष और शासन-प्रशासन के प्रमुख चेहरे एक मंच पर; विकास, रोजगार, आपदा, शहरीकरण, ऊर्जा, जमीन और 2027 की सियासत पर हुआ मंथन
देहरादून। सियासत, शासन और उत्तराखंड के भविष्य से जुड़े सवालों पर गंभीर संवाद के बीच देहरादून के राजपुर रोड स्थित हयात सेंट्रिक होटल में गुरुवार को The Adda Uttarakhand Conclave 2026 – The Road to 2027 का आयोजन हुआ। यह आयोजन साप्ताहिक समाचार पत्र अड्डा इनसाइडर की प्रथम वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित वार्षिकोत्सव का भी हिस्सा रहा।
कॉनक्लेव में सत्ता पक्ष और विपक्ष के प्रमुख राजनीतिक चेहरे एक ही मंच पर दिखाई दिए तो शासन-प्रशासन से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों ने नीतियों, योजनाओं और विकास की दिशा पर अपनी बात रखी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से लेकर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक, कांग्रेस उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना और भाजपा महामंत्री दीप्ति रावत भारद्वाज तक ने अपने-अपने नजरिये से उत्तराखंड के मौजूदा राजनीतिक और विकास परिदृश्य को सामने रखा।
कॉनक्लेव का सबसे अहम राजनीतिक सत्र मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की मौजूदगी में हुआ। मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाने के साथ कांग्रेस और उसके शीर्ष नेताओं पर भी निशाना साधा। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार धामी ने सरकार के कार्यकाल में रोजगार, विकास, सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने, पर्यटन और अन्य क्षेत्रों में किए गए कार्यों का उल्लेख किया। उन्होंने करीब 35 हजार युवाओं को सरकारी नियुक्तियां दिए जाने और 13 हजार एकड़ से अधिक सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने का दावा भी किया।

धामी का कांग्रेस पर हमला, बोले- जनता सब देख रही
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस नेताओं, खासकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी को निशाने पर लेते हुए कहा कि विपक्ष को सरकार के विकास कार्य दिखाई नहीं दे रहे हैं, लेकिन प्रदेश की जनता सब कुछ देख रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ‘छात्रों की गूंज’ नहीं बल्कि ’झूठ की गूंज’ कार्यक्रम कर रहे हैं।
धामी का कहना था कि उनकी सरकार विकास, सुशासन और जनकल्याण के एजेंडे पर आगे बढ़ रही है। उन्होंने सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तराखंड में विकास की दिशा में कई महत्वपूर्ण काम हुए हैं।
2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर मुख्यमंत्री ने साफ राजनीतिक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि भाजपा प्रदेश में फिर सरकार बनाएगी और 2027 में लगातार तीसरी बार सत्ता में आने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही है।
मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड के विकास मॉडल को रोजगार, पर्यटन, सीमांत क्षेत्रों के विकास और बुनियादी ढांचे से जोड़ते हुए सरकार की प्राथमिकताओं को भी सामने रखा।
धामी का यह संबोधन ऐसे समय में हुआ जब उत्तराखंड की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों का असर सार्वजनिक मंचों पर दिखाई देने लगा है। लिहाजा कॉनक्लेव का मंच विकास और नीतिगत चर्चा के साथ-साथ आने वाले चुनाव की राजनीतिक दिशा पर भी केंद्रित दिखाई दिया।

समापन सत्र में हरदा की एंट्री, राजनीतिक चाहत से लेकर रोजगार तक पर खुलकर बोले
कॉनक्लेव के समापन सत्र में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने उत्तराखंड की राजनीति, कांग्रेस की संभावनाओं और अपने लंबे राजनीतिक अनुभव को लेकर खुलकर बात की।
रावत ने अपने राजनीतिक सफर और उत्तराखंड के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का उल्लेख करते हुए 2027 में कांग्रेस की संभावनाओं पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने रोजगार के मुद्दे पर भाजपा सरकार को घेरते हुए दावा किया कि भाजपा सरकार अपने दस वर्ष के कार्यकाल में जितनी सरकारी नौकरियां नहीं दे पाई, उससे अधिक सरकारी नौकरियां उन्होंने अपने करीब तीन वर्ष के मुख्यमंत्री कार्यकाल में युवाओं को दी थीं।
रोजगार के सवाल पर रावत का यह दावा ऐसे समय में महत्वपूर्ण रहा जब उत्तराखंड की राजनीति में युवाओं और सरकारी नौकरियों को प्रमुख चुनावी मुद्दों में गिना जा रहा है।
रावत इससे पहले भी अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान रिक्त सरकारी पदों और भर्ती व्यवस्था का उल्लेख करते रहे हैं। हालिया सार्वजनिक बयानों में उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान भर्ती व्यवस्था को संस्थागत बनाने तथा अधीनस्थ सेवा चयन आयोग और शिक्षा एवं चिकित्सा क्षेत्र में भर्ती की दिशा में उठाए गए कदमों का भी उल्लेख किया है।
गणेश गोदियाल ने ब्यूरोक्रेसी को घेरा, चुनाव आयोग पर भी उठाए सवाल

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कॉनक्लेव के राजनीतिक सत्र में प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी पर सवाल उठाए।
गोदियाल ने आरोप लगाया कि प्रदेश में शासन और प्रशासन की व्यवस्था राजनीतिक प्रभाव से मुक्त नहीं है। उन्होंने भाजपा पर चुनाव आयोग के कथित दुरुपयोग का भी आरोप लगाया और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों को राजनीतिक विमर्श के केंद्र में रखा।
कांग्रेस की ओर से चुनाव आयोग और चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठाए जा रहे सवाल उत्तराखंड की आगामी चुनावी राजनीति के संदर्भ में खासे महत्वपूर्ण हैं। मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दे इस समय विपक्षी दलों के राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बने हुए हैं।

मंत्री कौशिक ने गिनाईं सरकार की उपलब्धियां
कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने सरकार की उपलब्धियों को सामने रखते हुए राज्य में किए जा रहे विकास कार्यों का ब्यौरा दिया।
उन्होंने सरकार की नीतियों और योजनाओं को उत्तराखंड के विकास से जोड़ते हुए कहा कि राज्य में बुनियादी ढांचे, पर्यटन, रोजगार और जनकल्याण के क्षेत्र में लगातार काम किया जा रहा है।
सत्ता पक्ष के अन्य वक्ताओं की तरह कौशिक ने भी सरकार के कार्यकाल को उपलब्धियों से जोड़ते हुए विपक्ष के आरोपों का जवाब देने की कोशिश की।

सूर्यकांत धस्माना ने भाजपा सरकार पर साधा निशाना
कांग्रेस उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने भाजपा सरकार की नीतियों और कामकाज पर सवाल उठाए।
धस्माना ने कांग्रेस के नजरिये से प्रदेश की मौजूदा राजनीतिक और प्रशासनिक स्थिति को सामने रखा तथा सरकार पर जनहित से जुड़े मुद्दों पर अपेक्षित काम नहीं करने का आरोप लगाया।
इस तरह कॉनक्लेव में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच विकास और उपलब्धियों को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए।

दीप्ति रावत भारद्वाज ने रखा सरकार का पक्ष
उत्तराखंड भाजपा महामंत्री दीप्ति रावत भारद्वाज ने सरकार की उपलब्धियों और भाजपा की नीतियों को सामने रखा।
उन्होंने सरकार के कामकाज को विकास और जनकल्याण के नजरिये से रखते हुए विपक्ष के आरोपों पर भाजपा का पक्ष रखा।
इस सत्र में खास बात यह रही कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं को एक ही मंच पर अपने-अपने मुद्दे रखने का अवसर मिला।
राजनीति से आगे—शासन और नीतियों पर भी गंभीर मंथन
अड्डा उत्तराखंड कॉनक्लेव को सिर्फ राजनीतिक बहस तक सीमित नहीं रखा गया। कार्यक्रम के अलग-अलग सत्रों में शासन, नीति, बुनियादी ढांचे, शहरी विकास, ऊर्जा और आपदा प्रबंधन जैसे विषयों पर भी गंभीर चर्चा हुई।
प्रदेश के वरिष्ठ अधिकारियों ने अपने-अपने विभागों की नीतियों और योजनाओं का ब्यौरा रखते हुए उत्तराखंड के विकास की मौजूदा दिशा और भविष्य की चुनौतियों पर बात की।

आर. मीनाक्षी सुंदरम ने ज्वलंत ऊर्जा और भूमि मामलों पर दी तस्वीर
प्रमुख सचिव डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम का सत्र कॉनक्लेव के सबसे महत्वपूर्ण नीति-केंद्रित सत्रों में रहा।
उन्होंने शासन और नीति निर्माण के व्यापक परिप्रेक्ष्य में उत्तराखंड के सामने मौजूद चुनौतियों पर बात की। खासतौर पर यूआईआईडीबी की करीब सात हजार बीघा जमीन निजी हाथों में सौंपे जाने के आरोप और छत्तीसगढ़ में मिले कोल ब्लॉक से प्रस्तावित थर्मल पावर प्लांट का काम अदाणी पावर को दिए जाने जैसे मुद्दों पर सरकार की तरफ से तस्वीर साफ करने का प्रयास किया।
इन मुद्दों को लेकर हाल के दिनों में प्रदेश की राजनीति में तीखी बहस रही है। ऐसे में कॉनक्लेव का मंच आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर सरकार के पक्ष को सीधे वरिष्ठ अधिकारी के माध्यम से सामने रखने का माध्यम बना।

पीडब्ल्यूडी सचिव पंकज कुमार पांडेय ने बुनियादी ढांचे की चुनौतियों पर रखी बात
पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क और बुनियादी ढांचे का निर्माण केवल विकास का विषय नहीं बल्कि आपदा और पर्यावरणीय संवेदनशीलता से भी जुड़ा हुआ है। लिहाजा राज्य के विकास मॉडल में इंफ्रास्ट्रक्चर और हिमालयी परिस्थितियों के बीच संतुलन की आवश्यकता पर भी विमर्श हुआ।

आवास सचिव आर. राजेश कुमार ने शहरीकरण की दिशा बताई
सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने उत्तराखंड में तेजी से बढ़ते शहरीकरण और आवास से जुड़े विषयों पर सरकार की नीतियों की जानकारी दी।
देहरादून समेत प्रदेश के प्रमुख शहरों पर बढ़ते आबादी के दबाव, नियोजित विकास और आवासीय जरूरतों के बीच संतुलन की चुनौती उत्तराखंड के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण विषय बन चुकी है।
बंशीधर तिवारी ने बताया—कैसे बदल रहा है उत्तराखंड का शहरी परिदृश्य
अपर सचिव मुख्यमंत्री एवं एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने एमडीडीए और राज्य में चल रहे शहरी विकास के कार्यों का विस्तृत ब्यौरा दिया।
उन्होंने नियोजित शहरीकरण, शहरों के विस्तार, आधारभूत ढांचे और भविष्य की शहरी जरूरतों के अनुरूप किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी।
उत्तराखंड में तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच यह सत्र इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि राज्य के पहाड़ी और मैदानी दोनों क्षेत्रों में शहरों का स्वरूप तेजी से बदल रहा है।

नेपाल आपदा के बाद हिमालय पर मंथन—साइंस, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन की भूमिका
कॉनक्लेव की शुरुआत भी उत्तराखंड की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक—आपदा प्रबंधन और हिमालयी संवेदनशीलता—से हुई।
उद्घाटन सत्र में यूकॉस्ट के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत ने नेपाल में आई आपदा के संदर्भ में हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते आपदा जोखिमों पर प्रकाश डाला।
उन्होंने विज्ञान, तकनीक और इनोवेशन की भूमिका को रेखांकित करते हुए बताया कि हिमालय जैसे संवेदनशील क्षेत्र में आपदा के खतरे को कम करने के लिए आधुनिक वैज्ञानिक तकनीक, बेहतर पूर्व चेतावनी प्रणाली, शोध और स्थानीय स्तर पर तकनीकी क्षमता को मजबूत करना आवश्यक है।
कॉनक्लेव के इस सत्र ने विकास बनाम आपदा जोखिम के उस सवाल को भी सामने रखा जो उत्तराखंड के लिए लगातार गंभीर होता जा रहा है।

एक मंच पर सत्ता, विपक्ष, ब्यूरोक्रेसी और समाज
The Adda Uttarakhand Conclave 2026 – The Road to 2027 की सबसे बड़ी विशेषता यही रही कि यहां उत्तराखंड के राजनीतिक और प्रशासनिक परिदृश्य के अलग-अलग पक्ष एक ही मंच पर दिखाई दिए।
एक तरफ मुख्यमंत्री और भाजपा के नेताओं ने सरकार की उपलब्धियां गिनाईं तो दूसरी ओर कांग्रेस के नेताओं ने सरकार की नीतियों और कामकाज पर सवाल उठाए। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अपने राजनीतिक अनुभव और 2027 की संभावनाओं पर बात की।
वहीं वरिष्ठ नौकरशाहों ने राजनीति से अलग शासन और नीति के नजरिये से प्रदेश के सामने मौजूद वास्तविक चुनौतियों पर चर्चा की।
कॉनक्लेव में बड़ी संख्या में अधिकारी, राजनीतिक दलों के नेता और कार्यकर्ता, शिक्षक, छात्र, पत्रकार तथा सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोग मौजूद रहे।
पहली वर्षगांठ से आगे—अड्डा इनसाइडर का नया पड़ाव
साप्ताहिक समाचार पत्र अड्डा इनसाइडर की पहली वर्षगांठ पर आयोजित यह कॉनक्लेव केवल एक साल की यात्रा का उत्सव नहीं रहा, बल्कि उत्तराखंड के राजनीतिक, सामाजिक और विकासात्मक विमर्श को एक मंच पर लाने का प्रयास भी बना।
एक साल के सफर के बाद अड्डा इनसाइडर ने जिस तरह राजनीति के साथ-साथ शासन, नीति, समाज, पर्यावरण, विज्ञान, रोजगार और विकास के मुद्दों को अपने विमर्श का हिस्सा बनाया है, कॉनक्लेव उसी संपादकीय दृष्टि का विस्तार दिखाई दिया।
इस आयोजन में उत्तराखंड के सामने मौजूद सवालों के साथ-साथ आगामी विधानसभा चुनाव की राजनीतिक दिशा भी स्वाभाविक रूप से चर्चा के केंद्र में रही।
कॉनक्लेव से निकला सबसे स्पष्ट संदेश यही रहा कि 2027 की राजनीतिक लड़ाई में विकास, रोजगार, शासन, शहरीकरण, ऊर्जा, जमीन, आपदा प्रबंधन और प्रशासनिक जवाबदेही जैसे मुद्दे अहम भूमिका निभाने वाले हैं। और इन सवालों पर सत्ता और विपक्ष की अपनी-अपनी तस्वीर है जिसे अड्डा उत्तराखंड कॉनक्लेव ने एक ही मंच पर आमने-सामने रख दिया।



