
- उत्तराखंड में चुनाव प्रक्रिया पर काज़ी निज़ामुद्दीन के तीखे सवाल, SIR से DAV छात्रसंघ चुनाव तक गिनाए उदाहरण
News in brief: कांग्रेस विधायक काज़ी निज़ामुद्दीन ने मतदाता सूची पुनरीक्षण और SIR की प्रक्रिया को लेकर चुनाव प्रबंधन पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पंचायत चुनाव में आठ बार रिकाउंटिंग, मंगलौर पालिका चुनाव और DAV छात्रसंघ चुनाव के उदाहरण देते हुए चुनाव प्रक्रिया में प्रशासनिक हस्तक्षेप के आरोप लगाए।
देहरादून: कांग्रेस प्रदेश मुख्यालय में बुधवार को मंगलौर विधायक काज़ी निज़ामुद्दीन ने पत्रकार वार्ता कर आगामी चुनाव प्रक्रियाओं, मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण और प्रशासनिक तंत्र की भूमिका को लेकर कई सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव जनता के विश्वास की बुनियाद हैं और किसी भी मतदाता के अधिकार का उल्लंघन नहीं होना चाहिए।
काज़ी निज़ामुद्दीन ने SIR की प्रक्रिया और मतदाता सूची की अंतिम सूची जारी होने को लेकर कांग्रेस की चिंता सामने रखी। उन्होंने कहा कि मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पहले ERO के स्तर पर नियमों के तहत मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया होती थी, लेकिन अब इससे जुड़े अधिकार दिल्ली स्थित चुनाव आयोग को सौंपे जाने की बात सामने आ रही है। उन्होंने कहा कि अंतिम सूची 20 तारीख को जारी होनी है और कांग्रेस को आशंका है कि कहीं इससे मतदाताओं के अधिकार प्रभावित न हों।
‘मतदाता के अधिकार के बीच चुनाव आयोग या प्रशासन का दखल?’
काज़ी निज़ामुद्दीन ने कहा कि मतदाता को अपनी पसंद के उम्मीदवार को वोट देने और उसे जिताने का पूरा अधिकार है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या जनता यह स्वीकार करेगी कि उसके इस अधिकार के बीच चुनाव आयोग या प्रशासन की दखलअंदाजी हो।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस प्रत्येक व्यक्ति के मत के अधिकार की सुरक्षा के लिए आवाज उठाएगी और किसी भी व्यक्ति के मताधिकार का उल्लंघन नहीं होने देगी।
पंचायत चुनाव में आठ बार रिकाउंटिंग का उदाहरण
कांग्रेस विधायक ने हरिद्वार जिले के नारसन ब्लॉक के ग्राम नाथून खेड़ी का उदाहरण देते हुए कहा कि सुशील कुमार ने ग्राम प्रधान का चुनाव लड़ा और कथित तौर पर 22 वोटों से जीत दर्ज की। उनके अनुसार, इसके बाद आठ बार रिकाउंटिंग कराई गई और आठवीं रिकाउंटिंग में उन्हें एक वोट से हारा हुआ घोषित कर दिया गया।
काज़ी निज़ामुद्दीन ने इसे मतदाताओं के साथ धोखा बताते हुए सवाल उठाया कि क्या देश में कहीं आठ बार रिकाउंटिंग की बात सुनी गई है।
यह दावा विधायक की ओर से पत्रकार वार्ता में किया गया है। इस मामले में संबंधित चुनाव प्राधिकरण या दूसरे पक्ष की प्रतिक्रिया सामने आने पर खबर को अपडेट किया जाएगा।
मंगलौर पालिका चुनाव का भी जिक्र
काज़ी निज़ामुद्दीन ने मंगलौर नगर पालिका से जुड़े पूर्व पालिका अध्यक्ष चौधरी इस्लाम का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि इस्लाम पहले निर्विरोध पार्षद चुने गए और 2013 में नगर पालिका अध्यक्ष का चुनाव जीते। इसके बाद पार्षद का चुनाव लड़ने और हारने का भी उन्होंने उल्लेख किया।
विधायक के अनुसार, बाद में जब इस्लाम ने फिर चुनाव लड़ने के लिए नामांकन किया तो सिंबल अलॉटमेंट के दिन एक व्यक्ति ने नजूल भूमि पर कब्जे की शिकायत की और उनका नामांकन निरस्त कर दिया गया। काज़ी निज़ामुद्दीन ने आरोप लगाया कि इस मामले में न तो जांच हुई और न ही सुनवाई का पर्याप्त अवसर दिया गया।
सहकारिता चुनाव में परिसीमन पर सवाल
उन्होंने सहकारिता चुनाव का उदाहरण देते हुए कहा कि परिसीमन पहले अधिसूचित किया गया, फिर उसे निरस्त कर बदलाव किया गया और नए परिसीमन के आधार पर चुनाव कराया गया। काज़ी निज़ामुद्दीन ने दावा किया कि यह पूरी प्रक्रिया करीब 15 दिनों के भीतर हुई।
उन्होंने कहा कि पंचायत से लेकर नगरपालिका और सहकारिता चुनाव तक चुनाव प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
DAV छात्रसंघ चुनाव में गिरफ्तारी का मामला भी उठाया
कांग्रेस विधायक ने देहरादून के DAV PG कॉलेज छात्रसंघ चुनाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने छात्र नेता विनीत भट्ट की गिरफ्तारी पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि उनके खिलाफ कोई मुकदमा था तो गिरफ्तारी के लिए छात्रसंघ चुनाव का इंतजार क्यों किया गया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस मुकदमे के खिलाफ नहीं है, बल्कि गिरफ्तारी के समय को लेकर सवाल उठा रही है। उनका आरोप है कि विनीत भट्ट कॉलेज के वोटर थे और चुनाव के दौरान उनके खिलाफ रातोंरात गैर-जमानती वारंट जारी कर कॉलेज परिसर से गिरफ्तारी की गई।
काज़ी निज़ामुद्दीन ने आरोप लगाया कि यह चुनाव को प्रभावित करने की साजिश थी और DAV PG कॉलेज में पुलिस-प्रशासन ने सत्ता के दबाव में काम किया।
उन्होंने दावा किया कि चुनाव के दौरान शाम तक ABVP पीछे चल रही थी और बाद में प्रशासन के सहयोग से परिणाम बदल गया। यह आरोप कांग्रेस विधायक की ओर से लगाया गया है; संबंधित प्रशासन, कॉलेज प्रबंधन और ABVP का पक्ष इस रिपोर्ट में शामिल नहीं है।
‘पहले पुलिस आती थी तो भरोसा होता था, अब संशय होता है’
काज़ी निज़ामुद्दीन ने कहा कि पहले चुनाव के दौरान जब पुलिस या अधिकारी मौके पर पहुंचते थे तो लोगों को भरोसा होता था कि अब व्यवस्था ठीक रहेगी और विवाद नहीं होगा। लेकिन अब उनके अनुसार, अधिकारियों और पुलिस के पहुंचने पर ही लोगों के मन में चुनाव प्रक्रिया को लेकर संशय पैदा होने लगा है।
उन्होंने भाजपा से अपील करते हुए कहा कि युवाओं को लोकतंत्र की प्रक्रिया पर भरोसा करना सिखाया जाना चाहिए और उन्हें स्वच्छ लोकतंत्र की बात बताई जानी चाहिए, क्योंकि युवा ही देश का भविष्य हैं।
राहुल गांधी के SIR संबंधी आरोपों का भी किया जिक्र
काज़ी निज़ामुद्दीन ने राहुल गांधी द्वारा चुनाव प्रक्रिया और SIR को लेकर उठाए गए सवालों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने तथ्यों और प्रस्तुतियों के आधार पर जो आरोप लगाए हैं, उन पर मीडिया और चुनाव आयुक्तों की टिप्पणियों का भी उल्लेख सामने आया है।
उन्होंने कहा कि उनके अनुसार देश और उत्तराखंड में अलग-अलग स्तरों पर चुनाव प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं—चाहे ग्राम पंचायत चुनाव हों, निकाय चुनाव, सहकारिता चुनाव या छात्रसंघ चुनाव।
कांग्रेस: एक-एक वोट के अधिकार की होगी सुरक्षा
पत्रकार वार्ता के अंत में काज़ी निज़ामुद्दीन ने कहा कि चुनाव आयोग की कार्यशैली को लेकर जनता के बीच संदेह पैदा होना लोकतंत्र के लिए गंभीर विषय है। उन्होंने दोहराया कि कांग्रेस प्रत्येक व्यक्ति के मताधिकार की सुरक्षा के लिए आवाज उठाएगी।
पत्रकार वार्ता में प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना, प्रदेश महामंत्री राजेंद्र शाह, प्रदेश प्रवक्ता डॉ. प्रतिमा सिंह, माइनॉरिटी डिपार्टमेंट के चेयरमैन सुलेमान अंसारी, सोशल मीडिया चेयरमैन अभिनव थापर, पूर्व पालिका अध्यक्ष इस्लाम अंसारी और मंगलौर पालिका अध्यक्ष समेत अन्य कांग्रेस नेता मौजूद रहे।



