
Pawan Lalchand
Dehradun।
उत्तराखंड भाजपा ने विधानसभा चुनाव-2027 (Uttarakhand Assembly Elections 2027) की तैयारी को अब खुलकर जमीन पर उतारना शुरू कर दिया है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन (Nitin Naveen) का अध्यक्ष बनने के बाद पहला उत्तराखंड दौरा इसी बड़े चुनावी संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।
देहरादून एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami), प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट और सैकड़ों भाजपा कार्यकर्ताओं ने नितिन नवीन का भव्य स्वागत किया। ढोल-दमाऊ, फूल-मालाएं, पहाड़ी टोपी और पारंपरिक परिधान में महिला कार्यकर्ताओं की मौजूदगी ने पूरे आयोजन को राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन में बदल दिया।

भाजपा कोर कमेटी बैठक में चुनावी रणनीति पर फोकस

देहरादून स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित कोर कमेटी की बैठक को इस दौरे का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। बैठक में राष्ट्रीय महामंत्री संगठन बीएल संतोष, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, प्रदेश प्रभारी दुष्यंत गौतम, सह प्रभारी रेखा वर्मा, प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट और पार्टी के सांसद शामिल हुए।

राजनीतिक जानकारों के मुताबिक यह बैठक केवल संगठनात्मक समीक्षा नहीं, बल्कि उत्तराखंड में भाजपा की चुनावी तैयारियों, बूथ मैनेजमेंट और राजनीतिक फीडबैक को लेकर अहम मंथन का मंच भी रही।
धामी सरकार के कामकाज को चुनावी नैरेटिव बनाने की तैयारी
भाजपा विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व और उनकी सरकार के फैसलों को प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाने की रणनीति पर काम करती दिख रही है।
समान नागरिक संहिता (UCC), नकल विरोधी कानून, भू-कानून और धार्मिक-सांस्कृतिक मुद्दों को भाजपा लगातार अपने राजनीतिक नैरेटिव का हिस्सा बना रही है। पार्टी इन्हें निर्णायक नेतृत्व और मजबूत सरकार की छवि के तौर पर जनता तक पहुंचाना चाहती है।
हालांकि बेरोजगारी, पलायन, सड़क, स्वास्थ्य सेवाएं और पर्वतीय क्षेत्रों की समस्याएं विपक्ष को सरकार पर हमला करने का अवसर भी दे रही हैं। ऐसे में भाजपा संगठन स्तर पर किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं छोड़ना चाहती।
उत्तराखंड भाजपा में संगठन को एक्टिव करने की कोशिश
राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के दौरे को भाजपा कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भरने के प्रयास के तौर पर भी देखा जा रहा है। एयरपोर्ट से लेकर शहर के कई प्रमुख चौराहों तक कार्यकर्ताओं की भीड़ जुटाकर भाजपा ने यह संदेश देने की कोशिश की कि उत्तराखंड में उसका संगठन अभी भी सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत बना हुआ है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा केंद्रीय नेतृत्व उत्तराखंड में सत्ता और संगठन के बीच बेहतर समन्वय बनाकर चुनावी तैयारी को तेज करना चाहता है। यही कारण रहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष के दौरे से पहले ख़फ़ा नज़र आ रहे पूर्व मुख्यमंत्री और हरिद्वार से पार्टी सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत और गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी को मुख्यमंत्री के साथ डिनर डिप्लोमेसी के बहाने बिठाकर ऑल इज़ वेल का संदेश दिया गया।
कांग्रेस के लिए भी राजनीतिक संदेश
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का यह दौरा विपक्ष, खासकर कांग्रेस, के लिए भी स्पष्ट राजनीतिक संदेश माना जा रहा है। जहाँ भाजपा चुनाव से पहले बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करने में जुटी दिखाई दे रही है, वहीं कांग्रेस अब भी नेतृत्व और रणनीतिक स्पष्टता के सवालों से जूझती नजर आती है। इस बीच कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व ने भी उत्तराखंड में पार्टी के हालात की सुध ली है और चार-पाँच जून को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी प्रदेश का दौरा करने आ रहे हैं।
जैसा कि उत्तराखंड का राजनीतिक ट्रेंड रहा है कि यहाँ की राजनीति में सत्ता विरोधी माहौल हमेशा बड़ा फैक्टर बनता आया है। ऐसे में भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती संगठनात्मक उत्साह को वास्तविक जनसमर्थन में बदलने की होगी। हालांकि भाजपा के लिए अच्छी बात यह है कि पार्टी ने पाँच साल सत्ता में रहने के बाद 2022 में जीत दोहराकर प्रदेश पॉलिटिक्स का ट्रेंड बदलने का प्रयास ज़रूर कर दिखाया था।

——————————-



